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नरेला के सरकारी राजा हरिश्चंद्र अस्पताल में इलाज से पहले डिजिटल टेस्ट! QR कोड और ABHA ऐप के चक्कर में मरीज परेशान?

नरेला के सरकारी राजा हरिश्चंद्र अस्पताल में इलाज से पहले डिजिटल टेस्ट! QR कोड और ABHA ऐप के चक्कर में मरीज परेशान?

Delhi SamacharDelhi Samachar12 October 2026, 07:20 AM10 views

नरेला के सरकारी सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र अस्पताल में अगर डॉक्टर को दिखाना है, तो अब सिर्फ बीमारी लेकर पहुंचना काफी नहीं! मोबाइल चलाना, ऐप डाउनलोड करना और QR कोड स्कैन करना भी आना चाहिए!

जरा सोचिए, अगर मरीज बुजुर्ग है, उसके पास स्मार्टफोन नहीं है या मोबाइल में इंटरनेट ही नहीं चल रहा, तो क्या वह इलाज कराने आया है या डिजिटल प्रक्रिया की परीक्षा देने?

बाहरी दिल्ली के नरेला स्थित सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र सरकारी अस्पताल में OPD रजिस्ट्रेशन के लिए ABHA ऐप और QR कोड की नई व्यवस्था शुरू होने के बाद मरीजों के सामने नई चुनौती खड़ी हो रही है। सरकार की इस डिजिटल पहल का मकसद रजिस्ट्रेशन आसान बनाना और लंबी कतारों से राहत देना है, लेकिन सवाल यह है कि जब मरीज ऐप समझने में ही समय लगा देगा, तो डॉक्टर तक पहुंचने में कितनी देर होगी?

डिजिटल सुविधा या मरीजों की नई मुसीबत?

नरेला के सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र सरकारी अस्पताल में OPD की पर्ची बनवाने के लिए मरीजों को डिजिटल प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। इसके लिए Google Play Store से ABHA ऐप डाउनलोड करना, आधार कार्ड या मोबाइल नंबर की मदद से रजिस्ट्रेशन करना और अपनी ABHA ID तैयार करनी होती है।

इसके बाद अस्पताल में लगाए गए QR कोड को स्कैन कर प्रोफाइल साझा करने और रजिस्ट्रेशन टोकन प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। टोकन मिलने के बाद रजिस्ट्रेशन डेस्क से OPD की पर्ची लेकर डॉक्टर से परामर्श किया जा सकता है।

लेकिन सवाल यह है कि जो मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचा है, क्या उसे पहले मोबाइल ऐप चलाने की ट्रेनिंग लेना जरूरी हो गया है?

पहले काउंटर, अब मोबाइल के चक्कर!

सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र सरकारी अस्पताल आने वाले कुछ मरीजों का कहना है कि पहले काउंटर पर अपनी जानकारी देकर पर्ची बनवाने में कम समय लगता था, लेकिन अब ऐप डाउनलोड करने, QR कोड स्कैन करने और डिजिटल प्रक्रिया पूरी करने में अतिरिक्त समय लग रहा है।

सबसे ज्यादा परेशानी उन बुजुर्गों और मरीजों को हो सकती है, जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है या जिन्हें मोबाइल ऐप इस्तेमाल करना नहीं आता। वहीं, इंटरनेट या नेटवर्क की समस्या होने पर भी रजिस्ट्रेशन में देरी हो सकती है।

ऐसे में सवाल उठता है कि डिजिटल इंडिया की सुविधा का लाभ हर मरीज को कैसे मिलेगा, जब हर मरीज डिजिटल तकनीक से परिचित ही नहीं है?

OPD का समय सीमित, मरीजों की चिंता बढ़ी!

जानकारी के मुताबिक, नरेला के सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र सरकारी अस्पताल में मरीजों की मदद के लिए 10 से 15 कर्मचारी तैनात होने की जानकारी है, जो नई रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को समझाने में सहायता कर रहे हैं।

लेकिन मरीजों की चिंता यह है कि OPD का समय दोपहर 12 बजे तक होने के कारण यदि रजिस्ट्रेशन में देरी हुई, तो डॉक्टर तक पहुंचने में मुश्किल हो सकती है।

ऐसे में सवाल सिर्फ QR कोड का नहीं, बल्कि मरीजों के समय और इलाज तक उनकी पहुंच का भी है। आखिरकार, अस्पताल आने वाले मरीज की पहली जरूरत इलाज है, न कि तकनीकी प्रक्रिया में उलझना।

नरेला के सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र सरकारी अस्पताल में डिजिटल रजिस्ट्रेशन की यह पहल मरीजों को राहत देने के उद्देश्य से शुरू की गई है। लेकिन यह व्यवस्था तभी सफल होगी, जब इसका लाभ बुजुर्गों, जरूरतमंद मरीजों और स्मार्टफोन नहीं रखने वाले लोगों तक भी पहुंचे।

जरूरत है कि अस्पताल में डिजिटल रजिस्ट्रेशन के साथ पर्याप्त हेल्प डेस्क, प्रशिक्षित कर्मचारी और जरूरतमंद मरीजों के लिए वैकल्पिक रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी सुनिश्चित की जाए।

क्योंकि सवाल सीधा है—नरेला के सरकारी राजा हरिश्चंद्र अस्पताल में मरीज इलाज कराने आए हैं या QR कोड स्कैन करने की परीक्षा देने?

रिपोर्ट : प्रदीप यादव

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दिल्ली और एनसीआर की खबरों को कवर करने का 5 साल से ज्यादा का अनुभव। अपराध, राजनीति से लेकर सामाजिक मुद्दों तक — हर बीट पर पैनी नजर।