राजधानी दिल्ली के नरेला क्षेत्र में धार्मिक उल्लास और सांस्कृतिक धरोहर की प्रतीक 'सुभाष रामलीला ड्रामाटिक क्लब (रजिस्टर्ड)' द्वारा आज, 13 सितंबर 2026 को दशहरा मैदान में पूर्ण विधि-विधान के साथ भूमि पूजन, ध्वजारोहण एवं हवन-अनुष्ठान का आयोजन किया गया। मंत्रोच्चार के बीच हुए इस भूमि पूजन के साथ ही नरेला की सबसे प्राचीन रामलीला के भव्य मंचन, पंडाल निर्माण और विशाल मेले की तैयारियों का औपचारिक शुभारंभ हो चुका है।
इस ऐतिहासिक रामलीला का इतिहास भारत की स्वतंत्रता जितना ही प्राचीन है संस्था के प्रधान विष्णु भारद्वाज ने बताया कि उनके पूर्वजों द्वारा यह परंपरा वर्ष 1947 में शुरू की गई थी। 1961 तक यह दंगल (मैदानी) रूप में आयोजित होती थी और 1967 से इसे भव्य स्टेज शो का रूप दिया गया। वर्ष 1966 में गुरु भगवान दास जी के सानिध्य में संस्था ने अपने हाथों से रामायण की प्रति लिखी थी, जिसके दोहों और चौपाइयों के आधार पर आज भी कलाकार मंचन करते हैं। पिछले वर्ष 2025 में इस रामलीला को अपनी भव्यता और अनुशासन के लिए दिल्ली की cm रेखा गुप्ता द्वारा विशेष अवार्ड से सम्मानित भी किया जा चुका है।
आयोजकों के अनुसार, इस वर्ष श्रद्धालुओं और दर्शकों के लिए अनुभव बेहद खास होने वाला है
इस बार प्रभु श्रीराम का राजदरबार और मंच की तकनीकी सजावट पूरी दिल्ली में आकर्षण का मुख्य केंद्र रहेगी।
विशालकाय पुतले, अत्याधुनिक झूले, दिल्ली के प्रसिद्ध व्यंजनों के स्टॉल और हज़ारों दर्शकों के लिए आरामदेह बैठने की व्यवस्था की जा रही है।
आयोजक समिति ने समस्त नरेला एवं आसपास के धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से इस सांस्कृतिक व धार्मिक महाउत्सव में सपरिवार शामिल होने की भावभरी अपील की है।
रिपोर्ट - सोनू आउटर नॉर्थ दिल्ली


