दिल्ली सरकार के मानसून तैयारियों के दावों की जमीनी हकीकत देखिए। यह तस्वीर है घेवरा मोड़ से कंझावला और बवाना होते हुए नरेला जाने वाली मुख्य सड़क की, जहां पहली ही बारिश के बाद सड़क तालाब में तब्दील हो गई है। हालात ऐसे हैं कि स्कूली बच्चों को घुटनों तक भरे पानी में चलकर अपने स्कूल पहुंचना पड़ रहा है।
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि सड़क पर जलभराव इतना ज्यादा है कि यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि पानी के नीचे सड़क है या गड्ढा। ऐसे में अगर किसी बच्चे का पैर गड्ढे में फंस जाए, वह गिरकर घायल हो जाए या कोई बड़ा हादसा हो जाए, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?
सबसे हैरानी की बात यह है कि यह स्थिति मानसून की शुरुआती बारिश में ही देखने को मिल रही है। जबकि दिल्ली सरकार और संबंधित विभागों ने मानसून से पहले जलभराव रोकने, नालों की सफाई और बेहतर जलनिकासी के बड़े-बड़े दावे किए थे। लेकिन जमीनी हकीकत उन दावों की पूरी तरह पोल खोलती नजर आ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बारिश के दौरान इसी सड़क पर जलभराव की समस्या होती है, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं किया गया। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में लगातार बारिश के बीच हालात और भी भयावह हो सकते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों, नौकरीपेशा लोगों और रोजाना इस रास्ते से गुजरने वाले हजारों लोगों को उठानी पड़ेगी।
रिपोर्ट - ज्योति सिंह

