बाहरी दिल्ली के नरेला स्थित सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र अस्पताल में सफाई कर्मचारियों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कर्मचारियों ने अस्पताल परिसर में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का आरोप है कि अस्पताल के नए सेनेटरी इंस्पेक्टर अनिल दहिया की कार्यशैली के कारण उन्हें मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। कर्मचारियों ने अनिल दहिया पर जबरन अतिरिक्त कार्य कराने और बिना सहमति ड्यूटी शिफ्ट बदलने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि अनिल दहिया उनसे उनकी निर्धारित जिम्मेदारियों से बाहर के काम भी करवा रहे हैं। उनका आरोप है कि वर्षों से चली आ रही ड्यूटी की समय-सारिणी बदलने का दबाव भी बनाया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि उन्हें केवल उनकी निर्धारित जिम्मेदारियों के अनुरूप ही कार्य सौंपा जाए और उनकी पुरानी ड्यूटी शिफ्ट बहाल की जाए।
धरने पर बैठे कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि अनिल दहिया के कार्यकाल में लगातार मानसिक दबाव के कारण उनके एक साथी की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई। उनका दावा है कि पहले उसे अस्पताल में समुचित इलाज नहीं मिला और बाद में एलएनजेपी अस्पताल रेफर किया गया, जहां उसकी हालत अब भी गंभीर बनी हुई है।
वहीं, एक कर्मचारी ने आरोप लगाया कि 14 से 15 वर्षों की सेवा के बावजूद उसे बिना किसी स्पष्ट कारण नौकरी से हटा दिया गया। उसका दावा है कि दोबारा नौकरी पर रखने के लिए उससे 50 हजार रुपये की मांग की गई। कर्मचारियों का कहना है कि अनिल दहिया के आने के बाद कार्यस्थल का माहौल लगातार खराब हुआ है।
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने नए सेनेटरी इंस्पेक्टर अनिल दहिया के तत्काल तबादले की मांग की है। उनका कहना है कि वे मानसिक दबाव और अतिरिक्त बोझ के बिना सम्मानपूर्वक अपना काम करना चाहते हैं।
हालांकि, कर्मचारियों द्वारा अनिल दहिया पर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। इस पूरे मामले पर अस्पताल प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। प्रशासन का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित या प्रसारित किया जाएगा।

