राजधानी दिल्ली जहां विकास और स्वच्छता के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। लेकिन नरेला विधानसभा के अकबरपुर माजरा गांव की तस्वीरें इन दावों की सच्चाई सबके सामने ला रही हैं।
नरेल्ला विधानसभा वार्ड नंबर-5 का अकबरपुर माजरा पिछले करीब एक साल से गंदे सीवर और जलभराव की मार झेल रहा है। गांव की मुख्य सड़क अब सड़क कम और गंदे नाले ज्यादा दिखाई देती है। बदबूदार पानी में रोज़ाना स्कूली बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और वाहन चालक जान जोखिम में डालकर गुजरने को मजबूर हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शिकायतें लगातार की गईं, अधिकारी मौके पर पहुंचे, जनप्रतिनिधियों को जानकारी दी गई... तो आखिर समाधान क्यों नहीं हुआ? क्या निरीक्षण केवल फोटो खिंचवाने और खानापूर्ति तक सीमित रह गया है? क्या जनता की परेशानी अब सरकारी फाइलों में दबकर रह गई है?
ग्रामीणों का कहना है कि इसी रास्ते से छात्राएं स्कूल जाती हैं। बरसात के दिनों में सड़क और नाले का फर्क तक दिखाई नहीं देता। कई ई-रिक्शे और बाइक फिसलकर पलट चुके हैं, लोग घायल हो चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब भी गहरी नींद में सोया हुआ है। आखिर किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों किया जा रहा है?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि चुनाव से पहले विकास, स्वच्छता और बेहतर दिल्ली के बड़े-बड़े वादे किए गए थे। लेकिन अकबरपुर माजरा की हालत देखकर सवाल उठता है कि क्या विकास सिर्फ भाषणों और विज्ञापनों तक सीमित है? अगर राजधानी के गांवों की यह स्थिति है तो आम जनता आखिर किससे उम्मीद करे?
ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं हुआ तो वे नगर निगम चुनाव का बहिष्कार करेंगे और बड़े स्तर पर आंदोलन छेड़ेंगे। उनका कहना है कि उन्हें अब आश्वासन नहीं, ज़मीन पर काम चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल जिम्मेदार अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों से है—क्या अकबरपुर माजरा के लोगों को साफ सड़कें और जलभराव से मुक्ति मिलेगी, या फिर विकास के दावे यूँ ही गंदे पानी में बहते रहेंगे? क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन जागेगा, या इस बार जनता की आवाज़ सचमुच सत्ता के गलियारों तक पहुंचेगी?
फिलहाल, अकबरपुर माजरा की ये तस्वीरें विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं और जिम्मेदार तंत्र से जवाब मांग रही हैं।

