संसद के मानसून सत्र के दौरान दिल्ली एक बार फिर बड़े आंदोलनों का केंद्र बनती दिखाई दे रही है।
जहां जंतर-मंतर पर CJP कार्यकर्ता शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और कथित पेपर लीक मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं अब पंजाब के किसान भी दिल्ली की ओर कूच कर रहे हैं।
किसान संगठनों ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील यानी एफटीपी (FTP) के विरोध में राजधानी दिल्ली में महापंचायत का ऐलान किया है। देश बचाओ मोर्चा के बैनर तले किसानों से दिल्ली के किसान घाट पर पहुंचने की अपील की गई है।
आंदोलन से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इस महापंचायत में देशभर के 550 से अधिक किसान यूनियनों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है।
किसानों के दिल्ली मार्च को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। हरियाणा से दिल्ली आने वाले प्रमुख रास्तों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। शंभू बॉर्डर पर पुलिस ने कई स्तर की बेरिकेडिंग की है और बड़ी संख्या में पुलिस एवं अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है।
प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं।
उधर, किसानों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सरकार के सामने रखेंगे और महापंचायत के जरिए अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि किसानों को दिल्ली में प्रवेश की अनुमति मिलती है या नहीं और आज का यह प्रदर्शन किस दिशा में आगे बढ़ता है।

