दिल्ली पुलिस का खाकी के पीछे छिपे मानवीय चेहरे की मिसाल आज सेंट्रल दिल्ली के ITO पर देखने को मिली। जब एक ट्रैफिक इंस्पेक्टर की तत्परता और सूझबूझ ने मौत के मुंह में समा रहे एक वकील को नई जिंदगी दे दी ।
खाकी का देवदूत, ITO पर ट्रैफिक इंस्पेक्टर ने बचाई वकील की जान
बात उस समय की है जब पटियाला हाउस कोर्ट के एडवोकेट नवनीत कुमार अपनी बाइक से तीस हजारी कोर्ट से पटियाला हाउस जा रहे थे। जैसे ही वह व्यस्त ITO रेड लाइट पर पहुंचे, अचानक उन्हें सीने में तेज दर्द उठा और वह बाइक समेत सड़क पर गिर पड़े।
चारों तरफ गाड़ियों की आवाजाही थी, लेकिन किस्मत से वहां कमला मार्केट सर्किल में तैनात ट्रैफिक इंस्पेक्टर गोपाल बैंसला अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद थे।
वकील को बेसुध गिरते देख इंस्पेक्टर बैंसला बिना एक सेकंड गवाएं उनकी तरफ दौड़े। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए उन्होंने सबसे पहले नवनीत का हेलमेट उतारा। नवनीत की सांसें उखड़ रही थीं और उनका शरीर ढीला पड़ रहा था।
समय ही जीवन है इस बात को साबित करते हुए इंस्पेक्टर बैंसला ने बिना एम्बुलेंस का इंतजार किए तुरंत नवनीत को सड़क पर ही CPR देना शुरू किया।
CPR मिलते ही नवनीत की सांसों में थोड़ी हलचल हुई, लेकिन खतरा टला नहीं था। इंस्पेक्टर बैंसला ने तुरंत नवनीत को अपनी सरकारी गाड़ी में डाला और बिना वक्त गंवाए पास के LNJP अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचाया।
डॉक्टरों ने बिना देरी किए नवनीत को आपातकालीन चिकित्सा दी। डॉक्टरों का साफ कहना था कि अगर मौके पर सही समय पर CPR न मिलता और अस्पताल लाने में कुछ मिनटों की भी देरी होती, तो नतीजा जानलेवा हो सकता था।
कुछ घंटों के इलाज और डॉक्टरों की कड़ी निगरानी के बाद नवनीत कुमार की हालत में सुधार आ गया। अब वह पूरी तरह से खतरे से बाहर हैं।
जहाँ एक तरफ CJP आंदोलन और अन्य विरोध प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस की सख्त कार्रवाइयों पर सवाल उठते रहते हैं, वहीं इंस्पेक्टर गोपाल बैंसला की यह जांबाजी और संवेदनशीलता यह याद दिलाती है कि हमारी पुलिस बल में ऐसे भी जाबांज अफसर मौजूद हैं, जिनके लिए जनसेवा और सुरक्षा ही सबसे बड़ा धर्म है।

