दिल्ली: कानून के लंबे हाथ – 29 साल बाद हत्या का आरोपी क्राइम ब्रांच की गिरफ्त में
अपराध चाहे कितना भी पुराना क्यों न हो, कानून की नजर से बच पाना आसान नहीं होता। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि न्याय की प्रक्रिया भले समय ले, लेकिन अपराधियों तक कानून के लंबे हाथ आखिरकार पहुंच ही जाते हैं।
करीब 29 वर्षों से फरार चल रहे हत्या के एक मामले के आरोपी को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। आरोपी को अदालत द्वारा पहले ही घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) घोषित किया जा चुका था और वह वर्षों से अपनी पहचान छिपाकर अलग-अलग जगहों पर रह रहा था।
यह मामला साल 1997 का है, जब दिल्ली के राजौरी गार्डन थाना क्षेत्र में हत्या का एक मामला दर्ज किया गया था। जांच के दौरान आरोपी फरार हो गया और लगातार पुलिस की गिरफ्त से बचता रहा। समय बीतता गया, लेकिन पुलिस ने उसकी तलाश बंद नहीं की।
क्राइम ब्रांच की विशेष टीम ने पुराने रिकॉर्ड खंगाले, केस से जुड़े सभी पहलुओं की दोबारा समीक्षा की और आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए मानवीय इनपुट (Human Intelligence), तकनीकी निगरानी (Technical Surveillance) और गहन जांच का सहारा लिया। कई महीनों की मेहनत और लगातार निगरानी के बाद पुलिस को आरोपी के उत्तर प्रदेश में छिपे होने की जानकारी मिली।
सूचना मिलने के बाद क्राइम ब्रांच की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ऑपरेशन चलाया और लखनऊ में दबिश देकर करीब 29 साल से फरार चल रहे आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के समय आरोपी अपनी पहचान बदलकर सामान्य जीवन जीने की कोशिश कर रहा था ताकि किसी को उस पर शक न हो।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी को अब दिल्ली लाया जा रहा है, जहां उससे हत्या के मामले सहित फरारी के दौरान उसकी गतिविधियों के संबंध में पूछताछ की जाएगी। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि फरारी के दौरान उसने किसी अन्य अपराध में तो भागीदारी नहीं की।
इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि अपराध करके वर्षों तक फरार रहने से कानून से बचा नहीं जा सकता। चाहे समय 5 साल का हो, 10 साल का या फिर 29 साल का—अपराधी को एक न एक दिन कानून के सामने जवाब देना ही पड़ता है।
फिलहाल पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी हुई है और मामले की विस्तृत जांच जारी है।
रिपोर्टर - रावेन्द्र कुमार

