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दिल्ली पुलिस ने 1 नवंबर की कांग्रेस रैली को दी रामलीला मैदान में अनुमति, NSUI नेताओं ने उठाए सवाल

दिल्ली पुलिस ने 1 नवंबर की कांग्रेस रैली को दी रामलीला मैदान में अनुमति, NSUI नेताओं ने उठाए सवाल

Delhi SamacharDelhi Samachar18 October 2026, 10:51 AM7 views

दिल्ली में 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित कांग्रेस की रैली को दिल्ली पुलिस से अनुमति मिलने के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। दिल्ली विश्वविद्यालय के NSUI अध्यक्ष रौनक खत्री और उपाध्यक्ष दीपांशु शौकीन ने प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थान और युवाओं को अपनी बात रखने के अधिकार को लेकर सवाल उठाए हैं। दोनों छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को सीमित स्थानों पर रखने की व्यवस्था लोकतांत्रिक आवाज को कमजोर कर सकती है।

NSUI अध्यक्ष रौनक खत्री ने कहा कि जिस प्रदर्शन को जंतर-मंतर पर होना चाहिए था, उसे रामलीला मैदान में आयोजित करने की अनुमति देना सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि रामलीला मैदान और बुराड़ी जैसे स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को सीमित रखने की व्यवस्था की जा रही है, जिससे बड़ी संख्या में लोग जुटने के बावजूद प्रदर्शन का प्रभाव कम हो सकता है।

रौनक खत्री ने अपने बयान में शाहदरा और बुराड़ी में प्रदर्शन के लिए स्थान निर्धारित किए जाने का भी जिक्र किया। उन्होंने किसान आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि किसानों को भी बुराड़ी मैदान में प्रदर्शन करने का विकल्प दिया गया था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया था। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को भी अपने प्रधानमंत्री से सीधे सवाल पूछने और अपनी मांगें रखने का अधिकार मिलना चाहिए।

वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष दीपांशु शौकीन ने कहा कि युवाओं को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिलना लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह प्रदर्शनकारियों को सीमित करने की कोशिश की जा रही है, वह गलत है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को सामने आना चाहिए।

शौकीन ने कहा कि यदि अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना ही गैरकानूनी माना जाने लगे, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि युवाओं का भविष्य सुरक्षित रखना देश की प्रगति के लिए जरूरी है और DU छात्रों के अधिकारों की लड़ाई में उनके साथ खड़ी है।

दोनों छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया कि युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनकी मांगों को सुना जाना चाहिए। अब इस मुद्दे पर दिल्ली पुलिस और संबंधित प्रशासन का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा, ताकि प्रदर्शन की अनुमति, निर्धारित स्थल और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके।

रिपोर्ट: प्रदीप यादव

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