हरिद्वार में मानसून के दौरान संभावित बाढ़, जलभराव और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी कड़ी में हर की पौड़ी समेत जनपद के पांच प्रमुख स्थानों पर मेगा मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस अभ्यास का उद्देश्य विभिन्न विभागों की आपदा प्रबंधन क्षमता को परखना और आपसी समन्वय को मजबूत बनाना था।
मॉक ड्रिल में प्रशासन, पुलिस, राजस्व विभाग, एसडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन सेवा और अन्य संबंधित एजेंसियों ने संयुक्त रूप से हिस्सा लिया। अभ्यास के दौरान बाढ़ और जलभराव जैसी परिस्थितियों का वास्तविक माहौल तैयार किया गया। टीमों ने सूचना मिलने से लेकर मौके पर पहुंचने, घायलों को सुरक्षित बाहर निकालने, प्राथमिक उपचार देने, राहत शिविर स्थापित करने और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया का अभ्यास किया।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि राज्य सरकार के निर्देश पर मानसून से पहले पूरे प्रदेश में इस तरह की मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार में पिछले वर्षों में आई प्राकृतिक आपदाओं के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए यह अभ्यास कराया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में सभी विभाग तेजी और बेहतर समन्वय के साथ राहत एवं बचाव कार्य कर सकें।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि मॉक ड्रिल के दौरान सामने आने वाली कमियों की समीक्षा कर आवश्यक सुधार किए जाएंगे। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि मानसून के दौरान प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें, अफवाहों से बचें और किसी भी आपात स्थिति की सूचना तुरंत संबंधित विभागों को दें, ताकि समय रहते राहत कार्य शुरू किया जा सके।

