दिल्ली के आनंद विहार से 14 अक्टूबर को 200 नई इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत किए जाने की योजना है। इन बसों के शामिल होने के बाद राजधानी में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही पांच नए चार्जिंग स्टेशन भी शुरू किए जाने की तैयारी है, जिससे इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए चार्जिंग सुविधाओं का विस्तार होगा।
नई बसों के आने के बाद दिल्ली में बसों का कुल बेड़ा 6900 के पार पहुंच जाएगा। हालांकि, बसों की संख्या बढ़ने के साथ दिल्ली परिवहन निगम यानी डीटीसी के सामने इनके बेहतर संचालन और प्रबंधन की चुनौती भी होगी। यात्रियों को नई बसों का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब उन्हें जरूरत के हिसाब से अलग-अलग रूटों पर चलाया जाएगा और समय-सारिणी के अनुसार बसों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
वहीं, डीटीसी के प्रबंध निदेशक जितेंद्र यादव का 4 अक्टूबर को तबादला होने के बाद यह पद रिक्त है। ऐसे में निगम की प्रशासनिक व्यवस्था और नई बसों के संचालन की जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
इलेक्ट्रिक बसों की बढ़ती संख्या के बीच चार्जिंग व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी होगा। पांच नए चार्जिंग स्टेशन शुरू होने से सुविधा बढ़ेगी, लेकिन बिजली की उपलब्धता और डिपो में पर्याप्त चार्जिंग इंतजाम बनाए रखना भी अहम रहेगा।
इसके अलावा पिंक सहेली कार्ड के इस्तेमाल में महिला यात्रियों को आ रही परेशानियों का समाधान करना भी निगम के लिए जरूरी है। बसों की संख्या बढ़ाने के साथ कार्ड सत्यापन, तकनीकी समस्याओं और भीड़भाड़ वाले रूटों पर अतिरिक्त बसों की व्यवस्था पर ध्यान देना होगा।
अब देखना होगा कि नई बसों और चार्जिंग स्टेशनों की शुरुआत से दिल्ली के यात्रियों को कितनी राहत मिलती है और डीटीसी अपनी सेवाओं को कितना बेहतर बना पाता है।
रिपोर्ट - ज्योति सिंह


